ग्राम प्रधानों की जगह प्रशासक नियुक्ति पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से दो दिन में मांगा जवाब
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के निर्वाचित ग्राम प्रधानों के स्थान पर प्रशासक नियुक्त किए जाने संबंधी राज्य सरकार के 25 मई 2026 के आदेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में सुनवाई हुई। मामले को गंभीर मानते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार को दो दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता संजय कुमार शर्मा ने स्वयं न्यायालय में पक्ष रखते हुए कहा कि यह मामला केवल ग्राम प्रधानों का नहीं, बल्कि पंचायती राज संस्थाओं की संवैधानिक स्वायत्तता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और ग्रामीण स्वशासन की रक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने न्यायालय से प्रशासकों की नियुक्ति संबंधी शासनादेश को असंवैधानिक घोषित कर निरस्त करने तथा पंचायत चुनाव शीघ्र कराने का अनुरोध किया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दलील दी कि ग्राम प्रधानों के स्थान पर प्रशासकों की नियुक्ति संविधान के 73वें संशोधन और उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है। इससे ग्राम पंचायतों की स्वायत्तता एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने प्रथम दृष्टया राज्य सरकार के आदेश पर गंभीर प्रश्न उठाए। साथ ही अपर मुख्य सचिव, पंचायती राज विभाग को आवश्यक निर्देशों के अनुपालन एवं न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।
