पुलिस प्रताड़ना से वृद्ध की मौत का आरोप, दरोगा समेत छह के खिलाफ मुकदमा
जौनपुर। गौराबादशाहपुर थाना क्षेत्र के नैपुरा (विझवार सारंग) गांव में करीब एक वर्ष पूर्व हुई वृद्ध सुदामा नागर की संदिग्ध मौत के मामले में नया मोड़ सामने आया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय के आदेश पर गौराबादशाहपुर पुलिस ने तीन ग्रामीणों और तीन पुलिसकर्मियों समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जौनपुर। गौराबादशाहपुर थाना क्षेत्र के नैपुरा (विझवार सारंग) गांव में करीब एक वर्ष पूर्व हुई वृद्ध सुदामा नागर की संदिग्ध मौत के मामले में नया मोड़ सामने आया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय के आदेश पर गौराबादशाहपुर पुलिस ने तीन ग्रामीणों और तीन पुलिसकर्मियों समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मृतक की पत्नी विमला देवी ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि उनके पति सुदामा नागर ने गांव के धर्मेन्द्र निषाद और उनके पिता मिठाईलाल को 15 हजार रुपये उधार दिए थे। रुपये वापस न करने पर सुदामा ने इसकी शिकायत पुलिस से की थी।आरोप है कि 12 अक्टूबर 2025 की सुबह धर्मेन्द्र निषाद, मिठाईलाल और अरविंद निषाद बातचीत के बहाने सुदामा को अपने साथ थाने ले गए। दोपहर करीब 12:30 बजे परिजनों को सूचना दी गई कि सुदामा की तबीयत खराब हो गई है। पत्नी विमला देवी और अन्य परिजन जब थाने पहुंचे तो सुदामा की मौत हो चुकी थी।विमला देवी का आरोप है कि थाने में तैनात उपनिरीक्षक रामलाल, हेड कांस्टेबल अभिषेक और हेड कांस्टेबल सुनील कुमार ने आरोपित ग्रामीणों के प्रभाव में आकर उनके पति के साथ मारपीट और प्रताड़ना की। उनका आरोप है कि इसी प्रताड़ना और सदमे के कारण सुदामा की मौत हुई।पीड़िता के अनुसार, घटना के बाद उन्होंने पुलिस के उच्चाधिकारियों और जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई न होने पर उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।सीजेएम न्यायालय के आदेश के बाद गौराबादशाहपुर पुलिस ने धर्मेन्द्र निषाद, अरविंद निषाद, मिठाईलाल तथा उपनिरीक्षक रामलाल, हेड कांस्टेबल अभिषेक और हेड कांस्टेबल सुनील कुमार के खिलाफ बीएनएस की धारा 106 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।