राजस्व न्यायालयों के कामकाज के विरोध में अधिवक्ताओं ने खोला मोर्चा, न्यायिक कार्यों के बहिष्कार का निर्णय
केराकत। राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को लेकर तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने मंगलवार को बैठक कर नाराजगी जताई। अधिवक्ताओं ने एसडीएम और तहसीलदार न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर मनमानी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। बैठक में तहसील के सभी राजस्व न्यायालयों के न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया।
केराकत। राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को लेकर तहसील बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने मंगलवार को बैठक कर नाराजगी जताई। अधिवक्ताओं ने एसडीएम और तहसीलदार न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर मनमानी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। बैठक में तहसील के सभी राजस्व न्यायालयों के न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया।बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश कुमार और महामंत्री हरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि राजस्व न्यायालयों में नियम-कानूनों की अनदेखी की जा रही है। आरोप लगाया कि कई मामलों में बिना उचित कारण पत्रावलियों को खारिज कर दिया जाता है या उन्हें लंबित रखा जाता है। इससे वादकारियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि बीएनएसएस की धारा 126, 135 और 170 (पूर्ववर्ती सीआरपीसी की धारा 107/116) से संबंधित मामलों में विपक्षी को नोटिस की विधिवत तामील कराए बिना ही गैर-जमानती वारंट और कुर्की के आदेश जारी किए जा रहे हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि ऐसी कार्यप्रणाली से आम लोगों के साथ-साथ अधिवक्ताओं को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।बैठक में राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में सुधार, निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित कराने और अधिवक्ताओं की समस्याओं का सम्मानजनक तरीके से समाधान कराने की मांग की गई। बार एसोसिएशन ने निर्णय लिया कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक अधिवक्ता राजस्व न्यायालयों के न्यायिक कार्यों से विरत रहेंगे।बैठक में पारित प्रस्ताव की प्रतिलिपि संबंधित उच्चाधिकारियों को भी भेजी गई है। इस दौरान नमः नाथ शर्मा, ज्ञान प्रकाश पांडेय, मुकेश शुक्ला, शारदा प्रसाद यादव, राजवंत कुमार, विपिन सिंह, संजय चौबे, अनिल सोनकर आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।