जौनपुर में फर्जी पुलिस की दबंगई, युवती की हालत नाजुक— सुरेरी थाने में इंसाफ नहीं, गाली-गलौज का आरोप

जौनपुर में फर्जी पुलिस की दबंगई, युवती की हालत नाजुक— सुरेरी थाने में इंसाफ नहीं, गाली-गलौज का आरोप
जौनपुर में फर्जी पुलिस की दबंगई, युवती की हालत नाजुक— सुरेरी थाने में इंसाफ नहीं, गाली-गलौज का आरोप

जौनपुर।

जनपद जौनपुर के थाना सुरेरी क्षेत्र से कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। 20 जनवरी 2026 को ग्राम कोचारी में पुलिस की फर्जी वर्दी की आड़ में दो महिलाओं पर किए गए जानलेवा हमले से पूरे इलाके में दहशत फैल गई है।

कोचारी निवासी जिलाजीत गौतम पुत्र राधेश्याम गौतम ने आरोप लगाया है कि गांव का ही रहने वाला इंद्रजीत उर्फ गौरव गौतम—जो खुद को पुलिसकर्मी बताकर क्षेत्र में रौब झाड़ता है—ने उनकी पुत्री दीपू कुमारी और उनकी विकलांग बहन मीना पत्नी राधेश्याम पर उस समय हमला कर दिया, जब दोनों महिलाएं घर में अकेली थीं।

आरोप है कि अभियुक्त ने ईंट-पत्थर, डंडों और लात-घूंसों से दोनों महिलाओं को बेरहमी से पीटा। दीपू कुमारी के सिर में ईंट लगने से वह मौके पर ही बेहोश हो गई, जबकि सीने और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। परिजनों का कहना है कि हमला पूरी तरह से हत्या की नीयत से किया गया।

घायलों की हालत बिगड़ने पर पहले उन्हें पीएचसी रामपुर ले जाया गया, जहां से 108 एंबुलेंस के जरिए सदर अस्पताल जौनपुर रेफर किया गया। बताया जा रहा है कि दीपू कुमारी रात करीब दो बजे तक बेहोशी की हालत में भर्ती रही और अब भी उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है।

थाने में इंसाफ नहीं, गाली-गलौज का आरोप

पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब वे थाना सुरेरी पहुंचे तो पुलिस ने उनकी फरियाद सुनने के बजाय कथित तौर पर गाली-गलौज कर भगा दिया। मजबूर होकर परिवार ने पुलिस अधीक्षक जौनपुर से शिकायत की, जिसके बाद सुरेरी पुलिस ने मात्र औपचारिक कार्रवाई करते हुए अभियुक्त का चालान कर दिया।

परिजनों का कहना है कि यह कार्रवाई न्याय नहीं, बल्कि मामले को दबाने की कोशिश है।

फर्जी वर्दी, ‘POLICE’ लिखी गाड़ी और खुलेआम धमकी

ग्रामीणों का आरोप है कि इंद्रजीत उर्फ गौरव गौतम लंबे समय से पुलिस की वर्दी पहनकर खुलेआम घूमता है, लोगों को धमकाता है और अपनी चार पहिया गाड़ी पर “POLICE” लिखवाकर क्षेत्र में दबदबा बनाए हुए है। इसके बावजूद पुलिस की ओर से अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।

आरोप यह भी है कि अभियुक्त लगातार विवादों में घिरा रहता है और उसके खिलाफ पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

मिलीभगत या लापरवाही?

अब इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—

क्या सुरेरी पुलिस अभियुक्त को संरक्षण दे रही है?

क्या फर्जी वर्दी पहनकर कानून को चुनौती देना अपराध नहीं रहा?

क्या दो महिलाओं की जान की कीमत सिर्फ एक चालान है?

इधर सदर अस्पताल में भर्ती दीपू कुमारी की हालत अब भी चिंताजनक बनी हुई है। परिजन न्याय की गुहार लगा रहे हैं और गांव में आक्रोश के साथ भय का माहौल व्याप्त है।

परिजनों का यह भी आरोप है कि अभियुक्त अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स (इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप) पर थाना सुरेरी के कुछ पुलिसकर्मियों की तस्वीरें प्रोफाइल व स्टेटस में लगाकर लोगों पर धौंस जमाता है, जिसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता, जवाबदेही और कानून के राज पर बड़ा सवाल बन चुका है।